Learning Objectives
- स्वयं प्रकाश की कहानी का सार समझना
- देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रेम की भावना को पहचानना
- पात्रों के चरित्र-चित्रण को समझना
- व्यंग्य और हास्य शैली को पहचानना
Key Concepts
लेखक परिचय
स्वयं प्रकाश (1947-2019) हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार हैं। उनकी कहानियों में सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य होता है।
कहानी का सार
एक कस्बे में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति लगी है, लेकिन मूर्ति पर चश्मा नहीं है (मूर्तिकार भूल गया था)। कस्बे का एक गरीब व्यक्ति कैप्टन चश्मेवाला बार-बार मूर्ति पर असली चश्मा लगाता है। जब भी चश्मा टूटता या गायब होता, वह नया चश्मा लगा देता। कैप्टन की मृत्यु के बाद भी किसी ने मूर्ति पर सरकंडे का छोटा चश्मा लगा दिया — यह देशभक्ति की भावना की जीत है।
संदेश
कहानी बताती है कि देशभक्ति बड़े-बड़े भाषणों में नहीं, छोटे-छोटे कार्यों में होती है। कैप्टन जैसे साधारण लोग ही सच्चे देशभक्त हैं।
Summary
यह कहानी एक साधारण चश्मे वाले व्यक्ति की असाधारण देशभक्ति की कहानी है। कैप्टन बार-बार नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाकर अपनी देशभक्ति व्यक्त करता है। उसकी मृत्यु के बाद भी यह परंपरा जारी रहती है।
Important Terms
- देशभक्ति
- अपने देश के प्रति प्रेम और समर्पण
- कैप्टन चश्मेवाला
- कहानी का मुख्य पात्र, गरीब लेकिन सच्चा देशभक्त
- व्यंग्य
- समाज की विसंगतियों पर कटाक्ष
Quick Revision
- नेताजी की मूर्ति पर चश्मा नहीं था
- कैप्टन चश्मेवाला बार-बार असली चश्मा लगाता था
- कैप्टन गरीब था लेकिन सच्चा देशभक्त
- उसकी मृत्यु के बाद किसी ने सरकंडे का चश्मा लगाया
- संदेश: देशभक्ति छोटे कार्यों में भी होती है
Practice Tips
- कैप्टन के चरित्र-चित्रण पर उत्तर लिखें
- कहानी का संदेश अपने शब्दों में लिखें