Learning Objectives
- नागार्जुन की कविता का भावार्थ समझना
- वात्सल्य भाव को पहचानना
- शिशु के निश्छल हास्य का महत्व समझना
- प्रगतिवादी काव्य धारा को जानना
Key Concepts
कवि परिचय
नागार्जुन (1911-1998) प्रगतिवादी काव्य धारा के प्रमुख कवि हैं। उनका असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था। उन्हें 'जनकवि' कहा जाता है। रचनाएँ: युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, भस्मांकुर।
कविता का भाव
कवि अपने नवजात शिशु (पोते) की दंतुरहित (बिना दाँतों की) मुसकान देखकर अभिभूत हो जाते हैं। शिशु की निश्छल मुसकान इतनी सुंदर और प्रभावशाली है कि वह कवि के कठोर हृदय को भी पिघला देती है। कवि कहते हैं कि इस छोटी सी मुसकान ने मृतक में भी जान डाल दी।
मुसकान की शक्ति
कवि ने शिशु की मुसकान को कमल के फूल की उपमा दी है जो कीचड़ (कठिनाइयों) में भी खिलता है। यह मुसकान धूल भरे जीवन में भी खुशी और आशा लाती है।
Summary
नागार्जुन की यह कविता एक शिशु की बिना दाँतों वाली मुसकान के सौंदर्य और शक्ति का वर्णन करती है। शिशु की निश्छलता और भोलापन कवि को गहराई तक प्रभावित करता है और जीवन की कठिनाइयों को भुला देता है।
Important Terms
- दंतुरहित
- बिना दाँतों की, छोटे शिशु की
- प्रगतिवाद
- साहित्यिक आंदोलन जो सामाजिक समानता और जन-कल्याण पर बल देता है
- वात्सल्य
- बच्चों के प्रति स्नेह और प्यार का भाव
- निश्छल
- सरल, कपट रहित, भोला
Quick Revision
- नागार्जुन प्रगतिवादी जनकवि हैं
- कविता शिशु की बिना दाँतों की मुसकान पर है
- शिशु की मुसकान कठोर हृदय को भी पिघला देती है
- कमल के फूल की उपमा दी गई है
- वात्सल्य भाव प्रधान कविता
Practice Tips
- कविता की पंक्तियों का भावार्थ लिखें
- शिशु की मुसकान की शक्ति पर अपने विचार लिखें
- नागार्जुन की अन्य रचनाएँ जानें