NCERT Hindi Class 10 - Chapter 3: Dev ke Savaiye - Notes

देव के सवैये

Learning Objectives

  • कवि देव के सवैयों का भावार्थ समझना
  • श्रृंगार रस और सौंदर्य वर्णन को पहचानना
  • रीतिकालीन काव्य परंपरा को जानना
  • अलंकार और छंद की पहचान करना

Key Concepts

कवि परिचय

देव (1673-1769) रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी काव्य भाषा ब्रजभाषा है। देव ने श्रृंगार रस के दोनों पक्षों — संयोग और वियोग — का सुंदर वर्णन किया है।

सवैया 1

इस सवैये में कवि ने कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन किया है। कृष्ण का श्याम वर्ण, मुरली बजाते हुए, पीताम्बर धारण किए — यह दृश्य अत्यंत मनमोहक है। कवि ने प्रकृति के उपमानों का प्रयोग करके कृष्ण के रूप-सौंदर्य को चित्रित किया है।

सवैया 2

इस सवैये में राधा-कृष्ण के प्रेम का चित्रण है। देव ने संयोग श्रृंगार का सुंदर वर्णन किया है। प्रकृति भी राधा-कृष्ण के प्रेम में सहभागी बनती है।

काव्य सौंदर्य

छंद: सवैया (प्रत्येक चरण में 22-26 वर्ण)। रस: श्रृंगार रस। अलंकार: उपमा, रूपक, अनुप्रास, उत्प्रेक्षा। भाषा: ब्रजभाषा, सरस और मधुर।

Summary

देव के सवैये रीतिकालीन काव्य परंपरा के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। इनमें कृष्ण के सौंदर्य और राधा-कृष्ण के प्रेम का अलंकारिक वर्णन है। ब्रजभाषा की मधुरता और छंद की लयात्मकता इन सवैयों को विशेष बनाती है।

Important Terms

सवैया
एक मात्रिक छंद जिसमें प्रत्येक चरण में 22-26 वर्ण होते हैं
रीतिकाल
हिंदी साहित्य का काल (1643-1843) जिसमें श्रृंगार और नायिका भेद प्रमुख विषय थे
श्रृंगार रस
प्रेम और सौंदर्य का रस, इसके दो भेद हैं — संयोग और वियोग
उत्प्रेक्षा
जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना व्यक्त की जाए

Quick Revision

  1. देव रीतिकाल के प्रमुख कवि हैं
  2. भाषा: ब्रजभाषा, छंद: सवैया
  3. कृष्ण के रूप-सौंदर्य का चित्रण
  4. श्रृंगार रस प्रधान काव्य
  5. अलंकार: उपमा, रूपक, अनुप्रास, उत्प्रेक्षा

Practice Tips

  • सवैयों का भावार्थ सरल हिंदी में लिखें
  • अलंकारों को उदाहरण सहित पहचानें
  • रीतिकाल की विशेषताएँ याद करें
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